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Wednesday, January 1, 2020

सुहागरात से जुड़ी काम की बातें 

अपने पार्टनर को मनोवैज्ञानिक तौर पर चुनौती दें। उसे अपनी बातों और व्यवहार से उत्तेजित करें। उसे गुस्सा दिलाएं, उसका तनाव बढ़ाएं। यदि झगड़े की नौबत आती है तो भी चिंता न करें। यहां झगड़े से मतलब ईगो से नहीं है कि दोनों मुंह फेरकर सो जाएं। हां, यह ध्यान रखें कि इसकी परिणति सेक्स के रूप में होनी चाहिए। ...अंत में यह होगा कि सेक्स के बाद न सिर्फ आपका तनाव दूर हो जाएगा बल्कि आप एक-दूसरे के और करीब आ जाएंगे
जब आप अपने पार्टनर से अंतरंगता चाहते हैं तो अपने साथी को जैसा है उसी रूप में स्वीकार करें। जब अब सुखद सेक्स की उम्मीद करते हैं तो आपको आपके सेक्स पार्टनर की खूबियों और खामियों का विश्लेषण नहीं करना चाहिए। आपका उद्देश्य सिर्फ सेक्स और शारीरिक सुख होना चाहिए।
आप अपने सेक्स पार्टनर के सामने अपनी भावनाएं खुलकर अभिव्यक्त करें। दूसरे व्यक्ति की तुलना में उसके साथ ज्यादा से बात करें। ऐसा करके आप अपने सेक्सुअल पार्टनर को अपने बारे में ज्यादा बताते हैं। ...और वह निश्चित ही आपकी ओर आ‍कर्षित होगा और आपको सेक्स करने में आसानी होगी।
अपनी बातों को बढ़ा-चढ़ाकर बताएं अर्थात माहौल में हास्य पैदा करें। हंसी-खुशी और मजाक से आप दोनों के बीच सेक्सुअल इंटरकोर्स होना संभव है, लेकिन अगर आप गंभीर हों और वातावरण बोझिल बना लेते हों संभव है आपका पार्टनर आपके साथ सेक्स के लिए तैयार ही न हो।
यदि पति अपनी उत्तेजना के कारण से आपको चुम्बन तथा आलिंगन कर रहा हो तो आप भी इसके बदले में पति को चूम सकती है। आप ऐसा करेंगी तो पति का आपके प्रति प्रेम तथा लगाव अधिक बढ़ेगा।यदि इस रात को पति दुबारा से सेक्स संबंध बनाना चाहे लेकिन पत्नी को इसकी इच्छा न हो तो उसे चाहिए कि पति को प्यार से समझाए और पति को भी पत्नी की बात का सम्मान करना चाहिए। सुहागरात को यदि पति पत्नी से कुछ पूछना चाहे तो पत्नी को इसका उत्तर देने का प्रयास करते रहना चाहिए। कभी भी गठरी की तरह चुपचाप बैठी न रहें। जहां तक सम्भव हो पति की बातों का समुचित उत्तर दें।
सुहागरात को कभी भी अपनी पत्नी के साथ अधिक छेड़छाड़ न करें। बहुत सी स्त्री ऐसी होती है जो पुरुषों के लिए बहुत उत्सुकता का केंद्र बनी रहती हैं। किसी भी युवती को देखकर व्यक्ति कल्पना में क्या से क्या कर जाता है, यह वही पुरुष जानता है जिसके अंदर कामोत्तेजना होती है। इसलिए जब पत्नी के रूप में कोई स्त्री मिल जाती है तो वह स्त्री शरीर के रहस्य को जानने को उत्सुक हो जाती है और जब स्त्री को अकेले में पाता हो तो उसके कपड़े को शरीर से अलग करने लगता है अर्थात वह चीर हरण करने पर उतारू हो जाता है। वह इतना अधिक उत्तेजना में आ जाता है कि स्त्री के होठों, गालों को चूमने के साथ-साथ उसके उठे स्तनों से भी छेड़छाड़ करने लगता है। उसमें इतनी अधिक कामवासना जाग जाती है जितना कि उसकी पत्नी को भी नहीं होता है। इसलिए कुछ करने से पहले ही स्त्री के साथ इतना छेड़छाड़ न करें कि कुछ करने की स्थिति पर पहुंच कर कुछ भी करने लायक न रहें। बहुत से व्यक्ति तो ऐसे होते हैं जो स्त्री के शरीर से छेड़छाड़ करते ही सोचते हैं कि स्त्री भी उसके लिंग को हाथ में लेकर सहलाए। कुछ स्थितियों में तो कुछ करने की तैयारी के पहले ही स्त्री के हाथों में लिंग आते ही वह स्खलित हो जाता है। इस चीज को समझने के लिए मैं आपको एक कहानी सुनाता हूं। बिहार का रहने वाला एक लड़का था जिसका नाम मोहन था। वह बहुत ही उत्तेजनशील स्वभाव का था। स्त्री के शरीर के बारे में वह ऐसी कल्पना के सागर में डूब जाता था कि बात-बात में अपने दोस्तों के सामने स्त्री के शरीर की अंदरुनी चीजों को बयान करने लगता था। वह यह सोचता था कि जब स्त्री पूरी तरह से निर्वस्त्र हो जायेगी तो देखने में कैसी लगेगी? उसके उभरे हुए स्तन कैसे लगेंगे? उसके होठों पर चुम्बन लेने से कैसा महसूस होगा? उसके शरीर के उत्तेजनशील अंगों को छूकर देखने से कैसा लगेगा? यह सब सोचते-सोचते उसकी उत्तेजना चरम पर पहुंच जाती थी और कभी-कभी तो वह स्खलित भी हो जाता था। जब वह 21 वर्ष का हो गया तो उसका विवाह कोमल नाम की लड़की से हो गया। जब वह सुहागरात के कमरे में गया तो उसने देखा कि कोमल पत्नी के रूप में पलंग पर उसका इंतजार कर रही थी। अब उसके मन में उत्तेजना के लड्डू फूटने लगे थे। वह अपने दिल को थामे पलंग की तरफ गया और कोमल के पास बैठ गया। इस समय उसके शरीर में उत्तेजना होने लगी थी। अब उसने पत्नी का घूंघट उठाकर अलग कर दिया। इस समय उसे ऐसा महसूस हो रहा था कि मानो कमरे में चांद निकल आया हो।
कोमल के लिपिस्टिक से रंगे सुर्ख होठों को देखकर उसकी उत्तेजना और भी बढ़ने लगी। इस समय तो वह उत्तेजना में इतना अधिक पागल हो गया था कि वह मन ही मन कल्पना कर रहा था कि इसके तो स्तन मेरी कल्पना से भी अधिक उठे तथा सुंदर है। इसके बाद उसके दिमाग पर हैवानियत सवार हो गया कि तुरंत ही अपने होंठों को कोमल के होंठों पर रखकर चूसने लगा। यह सब कोमल को बिल्कुल भी अच्छा न लग रहा था क्योंकि वह अचानक ही कमरे में बिना कुछ बात किये सीधे सेक्स क्रिया करने लगा था, कोमल को जरा सी भी उत्तेजना नहीं थी। मोहन हैवानों के तरीके से उसको चूसता रहा तथा अपने हाथों से उसके कपड़े को भी उतार फैंका और उसके स्तनों को जोर-जोर से दबाने लगा। कोमल ने विरोध तो करना चाहा लेकिन वह नहीं कर पाई। क्योंकि कोई भी लड़की चाहे कितनी ही मजबूत दिल वाली क्यो न हो सुहागरात को तो अंजान ही रहती है। मोहन ने कुछ देर बाद अपना तमतमाया चेहरा पीछे किया। उसकी सांसों की गति उत्तेजना के कारण से बहुत अधिक बढ़ चुकी थी। इसके बाद धीरे-धीरे कोमल ने सारे कपड़े उतार दिये। जल्दी ही वह पूरी तरह से निर्वस्त्र हो गई, वह स्त्री को इसी रूप में देखने की कल्पना करता रहता था। कोमल को बहुत अधिक लज्जा आ रही थी इसलिए उसने मोहन से कहा कि लाइट बंद कर दे, लेकिन वह माना नहीं और धीरे-धीरे अपने हाथों को उसके शरीर पर फेरता रहा। थोड़ी देर बाद मोहन ने भी अपने सारे कपड़े निकाल दिये। अब तो उत्तेजना उसकी चरम सीमा पर थी। उसने तुरंत ही सेक्स संबंध बनाने का प्रयास किया लेकिन जैसे ही अपने लिंग को कोमल की योनि में प्रवेश किया वैसे ही स्खलित हो गया। कुछ ही देर में उसका सारा जोश बर्फ की तरह ठंडा पड़ गया और एक तरफ बेजान शरीर की तरह लेट गया। कुछ देर बाद उसने अपने कपड़े पहने और लेट गई। यह रात कोमल पर बहुत भारी गुजरी, वह पूरी रात तड़पती तथा रोती रही। मोहन थोड़ी देर बाद जाग गया फिर भी उसकी हिम्मत नहीं हुई कि वह दुबारा कोमल को हाथ लगाये। इसके बाद अनेक बार ऐसा ही हुआ कि वह जैसे ही वह सेक्स क्रिया करने को होती वह स्खलित हो जाता। वह चिंता में पड़ गया कि मुझे कोई गुप्त रोग तो नहीं हो गया है या शीघ्रपतन का रोग तो नहीं हुआ। वह इतना अधिक चिंतित हो गया कि दिन रात इसी को सोचता रहता था। वह कई चिकित्सकों से मिला लेकिन वह संतुष्ट नहीं हुआ। एक दिन उसे एक सेक्स के बारे में जानने वाला चिकित्सक मिला जिसकी बाते उसको अच्छी लगी और इससे उसे काफी लाभ मिला। अब वह जान गया कि सेक्स क्रिया करने के समय में मैं जिस प्रकार से पत्नी के शरीर से छेड़खानी कर रहा था, सारा दोष उसी का है। अगली रात ही जब कोमल से सेक्स संबंध बनाने लगा तो उसने शारीरिक छेड़छाड़ कम की। जिसके बाद वह ठीक से संबंध बनाने में सफल रहा और धीरे-धीरे उसकी समस्यां पूरी तरह से खत्म हो गई। इस तरह से इनका वैवाहिक जीवन तबाह होने से बच गया। इस कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि यदि कोई भी समस्या हो तो उससे घबराना नहीं चाहिए बल्कि उसका हल निकालना चाहिए।

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