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Saturday, September 14, 2019

The chola dynasty in india

The chola dynasty in india

Chola Dynasty चोल राजवंश
चोलों के विषय में प्रथम जानकारी पाणिनी कृत अष्टाध्यायी से मिलती है।
चोल वंश के विषय में जानकारी के अन्य स्रोत हैं - कात्यायन कृत 'वार्तिक', 'महाभारत', 'संगम साहित्य', 'पेरिप्लस ऑफ़ दी इरीथ्रियन सी' एवं टॉलमी का उल्लेख आदि।
चोल राज्य आधुनिक कावेरी नदी घाटी, कोरोमण्डल, त्रिचनापली एवं तंजौर तक विस्तृत था।
यह क्षेत्र उसके राजा की शक्ति के अनुसार घटता-बढ़ता रहता था।
इस राज्य की कोई एक स्थाई राजधानी नहीं थी।
साक्ष्यों के आधार पर माना जाता है कि, इनकी पहली राजधानी 'उत्तरी मनलूर' थी।
कालान्तर में 'उरैयुर' तथा 'तंजावुर' चोलों की राजधानी बनी।
चोलों का शासकीय चिह्न बाघ था।
चोल राज्य 'किल्लि', 'बलावन', 'सोग्बिदास' तथा 'नेनई' जैसे नामों से भी प्रसिद्व है।
भिन्न-भिन्न समयों में 'उरगपुर' (वर्तमान 'उरैयूर', 'त्रिचनापली' के पास) 'तंजोर' और 'गंगकौण्ड', 'चोलपुरम' (पुहार) को राजधानी बनाकर इस पर विविध राजाओं ने शासन किया।
चोलमण्डल का प्राचीन इतिहास स्पष्ट रूप से ज्ञात नहीं है।
पल्लव वंश के राजा उस पर बहुधा आक्रमण करते रहते थे, और उसे अपने राज्य विस्तार का उपयुक्त क्षेत्र मानते थे।
वातापी के चालुक्य राजा भी दक्षिण दिशा में विजय यात्रा करते हुए इसे आक्रान्त करते रहे।
यही कारण है कि, नवीं सदी के मध्य भाग तक चोलमण्डल के इतिहास का विशेष महत्त्व नहीं है, और वहाँ कोई ऐसा प्रतापी राजा नहीं हुआ, जो कि अपने राज्य के उत्कर्ष में विशेष रूप से समर्थ हुआ हो।
Chola Dynasty
 The first information about the Cholas comes from Panini's Ashtadhyayi.
 Other sources of information about the Chola dynasty are Katyayana, 'Vartik', 'Mahabharata', 'Sangam Sahitya', 'Periplus of the Erythrian Sea' and mention of Ptolemy etc.
 The Chola kingdom extended to the modern Cauvery river valley, Coromandal, Trichinapali and Tanjore.
 This area used to fluctuate according to the power of its king.
 There was no permanent capital of this state.
 It is believed that on the basis of evidence, their first capital was 'Northern Manalur'.
 Later, 'Uraiyur' and 'Thanjavur' became the capital of the Cholas.
 The official symbol of the Cholas was the tiger.
 The Chola kingdom is also famous with names like 'Killi', 'Balavan', 'Sogbidas' and 'Nenai'.
 At various times, 'Uragpur' (near present 'Uraiyur', 'Trichinapali'), 'Tanjore' and 'Gangkound', 'Cholapuram' (Puhar) were made the capital by various kings.
 The ancient history of Cholmandal is not clearly known.
 The kings of the Pallava dynasty frequently attacked him, and considered him a suitable area to expand his kingdom.
 The Chalukya kings of Vatapi also invaded it while traveling in the south direction of Vijay.
 That is why, until the middle of the ninth century, the history of the Cholmandal was not particularly important, and there was no such majestic king, who was particularly capable in the hegemony of his kingdom.

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